हमारी कहानी
एक कमरा। थोड़ा पानी।
और बहुत धैर्य।
हम बड़े किसान नहीं हैं। नागपुर के 10 × 12 फ़ुट के एक कमरे में चार रैक पर हम माइक्रोग्रीन्स उगाते हैं — और वही आपके घर पहुँचाते हैं।
हमने 2026 में एक सीधे नियम से शुरुआत की: कल की पत्तियाँ कभी नहीं बेचेंगे। इसलिए छोटे-छोटे बैच में उगाते हैं, डिलीवरी की सुबह काटते हैं और ख़ुद आपके घर पहुँचाते हैं।

हमारा तरीक़ा
न मिट्टी, न खाद, न कीटनाशक। कुछ भी छिपा नहीं।
हम कोकोपीट इस्तेमाल करते हैं — नारियल की जटा से बना प्राकृतिक माध्यम। मिट्टी में रहने वाले कीटाणु और कीड़े यहाँ आते ही नहीं, इसलिए कीटनाशक की ज़रूरत ही नहीं पड़ती।
कमरे में वातानुकूलन है, हर शेल्फ़ पर दो LED ट्यूब और दो पंखे — यानी बाहर 45 डिग्री धूप हो या मूसलाधार बारिश, अंदर का मौसम साल भर एक-सा रहता है। इसलिए स्वाद और गुणवत्ता कभी नहीं बदलते।
4 रैक × 4 शेल्फ़ × 4 ट्रे = 64 ट्रे की जगह

7 से 21 दिन
बुवाई से आपकी थाली तक
दिन 0 — बीज साफ़ पानी में भिगोते हैं (फ़सल के अनुसार 4 से 18 घंटे)
दिन 1 — कोकोपीट की ट्रे में बराबर फैलाते हैं
दिन 2-4 — पूरा अंधेरा (ब्लैकआउट) — अंकुर ताक़त पकड़ते हैं
दिन 4-7 — रोशनी में आते हैं, हरे होते हैं
कटाई का दिन — आपका ऑर्डर आने के बाद ही कैंची से काटते हैं, तुरंत पैक
इसका मतलब एक ही — हम स्टॉक रखकर नहीं बेचते। आप जो खाते हैं वह उसी सुबह ज़िंदा था।
हमारा भरोसा
हम चार बातों का वादा करते हैं
न खाद, न कीटनाशक
न कीटनाशक, न फफूंदनाशक, न रासायनिक खाद। सिर्फ़ बीज, कोकोपीट, साफ़ पानी और LED रोशनी।
ऑर्डर के बाद कटाई
फ़्रिज में हफ़्ते भर पड़ा हुआ हम नहीं बेचते। आपका ऑर्डर आया, फिर कटाई।
वज़न सही
50 ग्राम कहा तो 50 ग्राम — पैकिंग का वज़न अलग। काँटा जाँचा हुआ है।
पसंद न आए तो
फ़ोटो भेजें और बताएँ। बहस किए बिना अगला ऑर्डर मुफ़्त। इतना आसान।
थोड़ा विज्ञान
माइक्रोग्रीन्स आख़िर क्या हैं?
बीज जमने के बाद पौधे को पहली दो असली पत्तियाँ आती हैं — उस अवस्था में काटा पौधा माइक्रोग्रीन है। यह अवस्था लगभग 7 से 17 दिन की होती है।
इस अवस्था में पौधा बीज में जमा ऊर्जा पर पलता है। शोध में कई विटामिन बड़ी पत्तियों की तुलना में माइक्रोग्रीन्स में ज़्यादा सघन पाए गए हैं; पौधा बड़ा होने पर उसमें पानी बढ़ता है और वही पोषक तत्व फैल जाते हैं।
स्रोत: Xiao Z. व अन्य, Journal of Agricultural and Food Chemistry, 2012 (USDA)। आँकड़े फ़सल के अनुसार बदलते हैं; हमारी ट्रे की लैब जाँच नहीं हुई है।
स्प्राउट्स और माइक्रोग्रीन्स — फ़र्क़ क्या?
स्प्राउट्स (अंकुर) — पानी में, अंधेरे में, जड़ के साथ खाए जाते हैं। 2-4 दिन। नम होने से कीटाणुओं का ख़तरा ज़्यादा।
माइक्रोग्रीन्स — माध्यम में, रोशनी में बढ़ते हैं। जड़ न खाकर डंठल के साथ काटते हैं। ज़्यादा सुरक्षित, स्वाद ज़्यादा।
रोज़ कितना खाना चाहिए?
दिन में 20 से 30 ग्राम काफ़ी है — यानी एक अच्छी मुट्ठी। 50 ग्राम का पैक दो लोगों को दो दिन चलता है।
ध्यान दें: खून पतला करने की दवा ले रहे हों तो विटामिन के ज़्यादा वाले प्रकार (केल, ब्रोकली) शुरू करने से पहले डॉक्टर से पूछें।
माइक्रोग्रीन्स भोजन हैं, दवा नहीं। किसी भी बीमारी के लिए अपने डॉक्टर से बात करें।
खाद्य सुरक्षा
FSSAI में पंजीकृत
हम लाइसेंसशुदा खाद्य व्यवसाय हैं। हम बिना ट्रीटमेंट वाले बीज, RO पानी, नया कोकोपीट, साफ़ की हुई ट्रे और साफ़ हाथ इस्तेमाल करते हैं, और कटाई के तुरंत बाद पत्तियाँ ठंडी करते हैं।
FSSAI 21526056007626
एक बार चखकर देखें
ट्रायल बॉक्स में तीन किस्में थोड़ी-थोड़ी हैं। पसंद न आए तो बताएँ — अगला ऑर्डर मुफ़्त।